Tuesday, December 20, 2011

Main Aur Mera Jeevan

जीतने की कोशिश में,
बस बार बार हारता रहा,
और कभी तो मजिल मिलेगी मुझको,
इसलिए हाँथ-पाँव मारता रहा ||



रोशनी की तलाश थी,
अंधेरों में भटकता रहा,
हर हार के बाद एक और हार,
यह दिल को बहुत खटकता रहा ||



जीतने की कोशिश में,
बस बार बार हारता रहा,
और कभी तो मजिल मिलेगी मुझको,
इसलिए हाँथ-पाँव मारता रहा ||



अरमा थी कुछ करने की,
इतिहास को बदलने की,
बस मैं नित्य पथ चलता रहा,
सारे वो दुःख-दर्द भूलकर,
आंधी और तूफ़ान झेलकर,
बस मैं चिराग सा जलता रहा ||



जीतने की कोशिश में,
बस बार बार हारता रहा,
और कभी तो मजिल मिलेगी मुझको,
इसलिए हाँथ-पाँव मारता रहा ||

No comments:

Post a Comment